शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

कौलाचार
"कौलाचार" कोई भद्दा कामुक परिहास नहीं है। "कौलाचार" है श्रेष्ठता। जो कुल शिव का हो, जो शक्ति का हो वही कुल "कौलों" का कुल है। जो कुल रहस्यों के आवरण को निर्मित करता हो, जो कुल रहस्यों की आवरण पूजा करता हो, वही "कौल" है। "कौल धर्म है" "कौल शिव हैं" और हम उन्हीं को अपना मानते हैं जो शिव के हैं। संसार में बहुत से हैं जो "शिव द्रोही" है। तब भी हम मौन है, क्योंकि उनकी गति भी प्रलय काल में शिव ही है। "कौल" होने के लिए "घंटाकर्ण वीर" होना जरूरी है। "कौल" होने के लिए शिव का गण "महाकाल" और "वीरभद्र" होना जरूरी है। शिव का होने के लिए बस उनका हो जाना जरूरी है। लोग पूछते हैं की देश के लिए वर्तमान परिस्थितियों के लिए, हम क्या कर रहे हैं? हमारा उत्तर है की सदियों से तुम्हारे संसार और इस देश के लिए, इसकी संस्कृति के लिए, कौन कार्य कर रहा है? देश की राजनीति हो या धर्म, नई पीढ़ी की दिशा हो या परिवर्तन का अभियान। हम सर्वत्र उपलब्ध हैं। अभी बताने का समय नहीं आया। लेकिन तुम्हारे साथ झंडे थामने वाला एक हाथ "महाहिन्दू" का है, शिव के "कौल गण" का है। जब तुम पिटते हो, तुम्हारे साथ हम भी पिट रहे हैं। जब तुम भूखे सोते हो, हम भी भूखे सो रहे हैं। देश के लिए, संसार को बदलने के लिए, तुम भी सामने हो और हम भी सामने हैं। बस अंतर ये है की तुम संसार के कार्य दिखा-दिखा कर, बता-बता कर करते हो और धर्म को अध्यात्म को अपने ह्रदय में रखते हो, हम उलट हैं, धर्म को अध्यात्म को बता-बता कर करते हैं, दिखा-दिखा कर करते हैं। लेकिन देश हित और विश्व कल्याण के कार्य गुप्त रीति से करते हैं। हमने तुमसे नहीं पूछा की क्या तुम शिव की पूजा करते हो? तो तुम मत पूछो की हम क्या करते हैं। "महाहिन्दू" को कभी भी मूक बैठा हुआ नहीं मानना चाहिए, वो तो मृत्यु आने के बाद भी बोलता है। क्योंकि वो शिव पर विश्वास रखता है और शत्रुओं से अनुरोद्ध करता है की शांति में सहयोग दें। अन्यथा आखिर में सिंह गरज उठाता है। धर्म सत्संग का विषय नहीं है, कथाओं का विषय नहीं है। वो तो निरंतर जीवन है, योग क्षेम है। एक ऐसी उच्चता है जो विनम्रता देती है। कडवे वचनके साथ ही मीठा ह्रदय देती हैं। लेकिन इन सबके बाबजूद "कौलान्तक संप्रदाय" का गोपनीय ज्ञान एक रहस्य था और रहेगा। बस उजागर होगी तो "महाहिन्दुओं" की सनातन गौरव दास्तान। 

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

शिवोऽहम्
To be in the Shiva state for always is called Mahayoga. To recite the name of Shiva,to keep him in one's heart, to surrender ones existence to Shiva and to understand Shiva is the Shiva state. Shiva is beyond the dualities of virtue and sins, high and lows, compliments and condemn. You too accept the form of his and then who is going to be here beside Shiva?-Kaulantak Peeth Team-Himalayad.
नित्य शिव भाव रहना ही महायोग है। मुख से शिव कहना, मन में शिव रखना,स्वयं के अस्तित्व को शिव से और शिव का समझना ही शिव भाव है। शिव पाप-पूण्य, उच्चता-नीचता, प्रशंसा-निंदा से पार हैं। तुम भी उनके स्वरूप को आत्मसात कर लो। फिर शिव के अतिरिक्त यहाँ कोई और है कहाँ?-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय।

शनिवार, 31 अगस्त 2019

ईशपुत्र की विशेषता
"ईशपुत्र" की ये विशेषता है की वो कहीं भी कभी भी साधना और ध्यान की गहराइयों में उतर सकते हैं। उनके लिए स्थान और कोलाहल भी मायने नहीं रखता। जीवन की सत्य धारा के परम पथिक "कौलान्तक नाथ" साधकों के मन में इष्ट की भांति बसते हैं। लेकिन ये सब अकारण नहीं होता। इस आकर्षण का रहस्य महाप्रतिभाशाली साधक स्वयं जानते हैं। पीठ केवल अपने सम्प्रदायानुगत साधकों के निमित्त "कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज" के कुछ और चित्र प्रस्तुत करती है। आशा है साधक वृन्द के हृदय कमलों का इन चित्रों से विकास होगा और भक्ति साधना का आनंद होगा-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय।

रविवार, 18 अगस्त 2019

ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के शुभ विचार - 7
"जीवन में 'सत्य का प्रकाश' मिलते ही आनंद के 'सुगन्धित पुष्प' ह्रदय वाटिका में 'महकने और खिलने' लगते हैं. ह्रदय के इस सौन्दर्य को दूसरा कोई भले ही न देख पाए किन्तु तुम अपने अंतस पर इसकी 'सुगंध और दिव्यता' अनुभव कर सकते हो-कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज"-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

माँ स्वप्नेश्वरी की गोद में विश्राम करते हुए
कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज हिमालय पर अपनी लम्बी साधना और लम्बी यात्रा के बाद कुछ क्षणों के लिए माँ स्वप्नेश्वरी की गोद में विश्राम करते हुए.......किन्तु ये बताना अनिवार्य है कि महायोगी जी हमारी तरह नहीं सोते.....वो जागृत निद्रा में ही रहते हैं.......दिन-रात जागते हैं.........आपके जीवन में भी सुख और चैन की आनन्द दायक सात्विक निद्रा आये.....इसी प्रार्थना के साथ-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.

गुरुवार, 15 अगस्त 2019

रक्षा बंधन के पवित्र पर्व की हार्दिक बधाई
रक्षा बंधन के पवित्र पर्व पर कौलान्तक पीठ टीम की ओर से सभी को हार्दिक बधाई व गुरु भाई-बहनों को रक्षाबंधन की विशेष शुभकामनाएं. भगवान शिव और माँ शक्ति आपकी सदैव रक्षा करें.....आपके जीवन को धन-धान्य व ज्ञान से उच्चकोटि का बनाए. 'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज' का तेज और सामर्थ्य आपको जीवन में चौंसठ कला पूर्ण बनाए.......राखी पर यही कामना-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.

रविवार, 11 अगस्त 2019

ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के शुभ विचार - 6
"बंद कमरों...सड़कों....शहरों और भीड़ से दूर निकल कर तुम खुद को महसूस करो.......अपने शरीर को...अपने अस्तित्व को.......अपने ह्रदय को.......अपनी क्षमताओं को.......और रुके हुए...धीरे-धीरे बहते समय को........अन्यथा नकली वातावरण में तुम कहीं अपने असलीपन को अपने होने के आनंद को न खो देना"-'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज'-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.

बुधवार, 31 जुलाई 2019

षोडशस्वरीय अष्ट सिद्धि मंत्र
'कौलान्तक पीठ हिमालय' प्रस्तुत करता है 'षोडशस्वरीय अष्ट सिद्धि मंत्र'। प्रस्तुत मंत्र की साधना व जाप और श्रवण से अष्टसिद्धियाँ योगियों को प्राप्त होती है। ये मंत्र दो भागों में विभक्त होता है जिसे शिव-शक्ति क्रम कहते हैं। अष्टसिद्धियों का ये मंत्र भैरव-भैरवियों को उच्चता प्रदान करेगा। इसी कामना के साथ-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय।
         'षोडशस्वरीय अष्ट सिद्धि मंत्र'
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ अणिमा सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ महिमा सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ लघिमा सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ प्राप्ति सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ र्इषिता सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ वशित्व सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ प्राकाम्य सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ कामवसायिता सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं

ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः अणिमा सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः महिमा सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः लघिमा सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः प्राप्ति सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः र्इषिता सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः वशित्व सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः प्राकाम्य सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं
ॐ लृ लृ ए ऐ ओ औ अं अः कामवसायिता सिद्धे हिरण्यगर्भिणी हुं 


रविवार, 28 जुलाई 2019

ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के शुभ विचार - 5
"इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि तुम कितने विख्यात हो......लेकिन इस बात से जरूर अंतर पड़ता है कि तुम्हारा अपने जीवन के प्रति नजरिया क्या है? अपने आप में कुछ हो जाने पर फिर संसार के प्रमाणीकरण की जरूरत ठीक वैसे ही नहीं रहती......जैसे कि हीरे को कोयले बीच भी कालिख का भय और अपनी श्रेष्ठता की चिंता नहीं होती"-'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज'-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय

मंगलवार, 23 जुलाई 2019

विरह क्या है ?
"विरह सौभाग्य है, श्रेष्ठता है, पवित्रता है....विरह तो साक्षात् वरदान ही है...........होठों को थरथराहट आँखों को सजलता देता है.........सिसकारियों के बीच कविता उठने लगती हैं......विछोह के बीच मिलन के गीत उठने लगते हैं.....आंसुओं की झिलमिलाहट प्रिय दर्शन में सहयोगी हैं....ये एक ऐसा सौभाग्य है कि तुम्हें........मीरा.......सूर.......कबीर.......की श्रेणी में खड़ा कर पूर्णता प्रदान करेगा, विरह दुःख नहीं है....विरह शत्रु भी नहीं..."-'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज"-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.