"ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ उन सब साधकों और भक्तों के लिए जो सीधे-साधे हैं...छल-प्रपंच से कोसों दूर हैं के ईश्वर उनको जीवन की यात्रा के मूल उद्देश्य तक पहुँचने में सहायक हो...क्योंकि हम में से किसी में इतना साहस नहीं के अपने सामर्थ्य और बल से आपकी ओर आ सकें....आपको समझ सकें...आपको पा सकें."-'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज'-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.
गुरुवार, 11 जुलाई 2019
शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
द्वार तेरे मैय्या आया है जोगी
द्वार तेरे मैय्या आया है जोगी
इच्छा क्या मैय्या पूरण नहीं होगी
इच्छा क्या मैय्या पूरण नहीं होगी
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
हिमालय में भटका मैय्या दर तेरा पाने
हिमालय में भटका मैय्या दर तेरा पाने
लिए कमंडल भटका मैया नीर तेरा लाने
लिए कमंडल भटका मैया नीर तेरा लाने
बिन दरस अब जाऊं नहीं मैं चाहे मुझको रुला दे
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
दर्शन को निकला मैय्या निकला भस्म मल कर
दर्शन को निकला मैय्या निकला भस्म मल कर
हिमालय भी पहुंचा मैय्या टूटा चल चल कर
हिमालय भी पहुंचा मैय्या टूटा चल चल कर
नीर बहे है नैनों से अब मुझको तू बुला ले
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
दुनिया नें मुझको मैय्या कहीं का न छोड़ा
दुनिया नें मुझको मैय्या कहीं का न छोड़ा
थक चूका हूँ जी के अब दिल को ऐसा तोडा
थक चूका हूँ जी के अब दिल को ऐसा तोडा
हर तरफ अँधियारा है अब आगे कैसे जाऊं
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
रिश्तों को देखा है नातों को जाना
रिश्तों को देखा है नातों को जाना
किस किस को अपना मैय्या मैंने माना
किस किस को अपना मैय्या मैंने माना
छूट गए हैं साथी सारे कैसे उनको मनाऊं
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
मैय्या रानी ओ काली मैय्या
- महासिद्ध ईशपुत्र
रविवार, 7 अप्रैल 2019
ऐं ह्रीं बीज दायक सुरगण नायक नमन करे भगवन्ता ।
हे अन्न धन वर्षिणी सब जग कर्षिणी दुख न पावे कोई,
जो रूप उजाला अति विकराला करो अनुग्रह सोई,
जय जय महाशक्ति अतुलित भक्ति व्यापक परमानंदा,
हे दुख विनाशिनी हृदय निवासिनी हरो मम वेगी प्रचण्डा ।
जेहि जोगी विरागी यति अनुरागी सुमिरत त्यागे काया,
निशि वासर ध्यावहिं गुण गण गावहिं जयति योगमाया ।
जय जय तेजस्विनी महातपस्विनी पतित पावनी गंगा,
जो काली कपालिनी महाविकरालिनी नित रहे शिव के संगा,
तू ही महालक्ष्मी दुर्गा काली अंत न पावे कोई,
जो मन से ध्यावे सुने सुनावे अनुग्रह पावे सोई,
जय जय हे भवानी शिव पटरानी तू ही ज्ञान निकंदा,
हे महाविलासिनी हृदय निवासिनी हरो मम वेगी प्रचण्डा ।
जेहि जोगी विरागी यति अनुरागी सुमिरत त्यागे काया,
निशि वासर ध्यावहिं गुण गण गावहिं जयति योगमाया ।
जय जय शिवनायिका हे महाकालिका गण है तेरे हनुमंता,
नित उठ गावे तुझे सुनावे यश तेरा तुझको संता,
मां तू ही भवानी महादयानी तुझको ध्यावे जोई,
अतुलित भक्ति अतुलित शक्ति नित नित पावे सोई,
हे मां अविनाशी हे सुखराशि तू ही परमानंदा,
कैलाश निवासिनी दैत्य विनाशिनी हरो मम वेगी प्रचण्डा ।
जेहि जोगी विरागी यति अनुरागी सुमिरत त्यागे काया,
निशि वासर ध्यावहिं गुण गण गावहिं जयति योगमाया ।
जयति योगमाया ।
जयति योगमाया ।
जयति योगमाया ।
- महासिद्ध ईशपुत्र
गुरुवार, 7 जून 2018
देश और दुनिया में हो रही डरा देने वाली घटनाओं को देखते हुए हिमालय की ऊँचाइयों पर 'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज' एक अद्भुत प्रार्थना करते हैं. जो आज से पहले नहीं देखी या सुनी गई.
फूल संसार के दुखी प्राणियों को मिले, सुख संसार के पीड़ितों को मिले, जो गरीब है वो धन धान्य से भर जाएँ, जो रोगी हैं वो स्वस्थ हों,जिन्हें मान सम्मान चाहिए इश्वर उनको सम्मान दे............ये दुनियां सदा फले फूले......बदले में मुझे कांटे.....मुझे पीड़ा....मुझे अपमान.........मुझे बेदना मिले.....पर सृष्टि किसी को पीड़ा न दे.....इसी प्रार्थना के साथ ध्यान का हिमालयों में अभ्यास करते कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज
"ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ उन सब साधकों और भक्तों के लिए जो सीधे-साधे हैं...छल-प्रपंच से कोसों दूर हैं के ईश्वर उनको जीवन की यात्रा के मूल उद्देश्य तक पहुँचने में सहायक हो...क्योंकि हम में से किसी में इतना साहस नहीं के अपने सामर्थ्य और बल से आपकी ओर आ सकें....आपको समझ सकें...आपको पा सकें."-'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज'-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.
फूल संसार के दुखी प्राणियों को मिले, सुख संसार के पीड़ितों को मिले, जो गरीब है वो धन धान्य से भर जाएँ, जो रोगी हैं वो स्वस्थ हों,जिन्हें मान सम्मान चाहिए इश्वर उनको सम्मान दे............ये दुनियां सदा फले फूले......बदले में मुझे कांटे.....मुझे पीड़ा....मुझे अपमान.........मुझे बेदना मिले.....पर सृष्टि किसी को पीड़ा न दे.....इसी प्रार्थना के साथ ध्यान का हिमालयों में अभ्यास करते कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज
"ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ उन सब साधकों और भक्तों के लिए जो सीधे-साधे हैं...छल-प्रपंच से कोसों दूर हैं के ईश्वर उनको जीवन की यात्रा के मूल उद्देश्य तक पहुँचने में सहायक हो...क्योंकि हम में से किसी में इतना साहस नहीं के अपने सामर्थ्य और बल से आपकी ओर आ सकें....आपको समझ सकें...आपको पा सकें."-'कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज'-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय.



