रविवार, 5 अगस्त 2018

एक अनूठे व्यक्तित्व हैं कौलान्तक नाथ
(यहाँ पाठकों को ये बताना चाहेंगे की तुमड़ी बाबा काफी बड़ी आयु के सिद्ध योगी हैं,जो महायोगी जी को करीब चौदह सालों से जानते हैं,तथा महायोगी को अपना बरिष्ठ गुरु भी कहते हैं,क्योंकि महायोगी जी के 38 गुरुओं में से एक शान्किरी योगिनी के ये भी शिष्य हैं,ये महायोगी जी से मिलने आये हुए थे कि मुझे बात करने का सुअवसर मिल गया,इनके शब्दों को ही, जितना याद रहा, मैं लेख के रूप में दे रहा हूँ)
-कुमुदवल्ली

अरे लोगों के मन में साधू सन्यासी या योगियों की एक छवि होती है,लेकिन महायोगी की छवि बनाना किसी के बस में नहीं,इनका असली व्यक्तित्व तो बहुत ही छिपा और गोपनीय है, इनको कौलान्तक नाथ के नाम से हिमालयों पर इनको सब पहचानते हैं, इन विराट योगी का जीवन कई अद्भुत रहस्यों से भरा है,सबसे पहले तो ये कि सबसे पुरानी परंपरा से जुड़े हैं,ऐसी परम्परा से जिसे जानने वाले भी बहुत कम शेष बचे हैं,फिर गुप्त कुल की सभी शक्तियों की साधना कर इन्होंने साधना क्षेत्र में इतिहास कायम किया है,जिसका महत्त्व आंकने वाला कम से कम भौतिक संसार में कोई नहीं हो सकता,अपर मंडल कि 48 देवियाँ हों या परात्पर मंडल के 26 शिव,कहा जाता है कि हिमालय में लम्बा नाथ योगी, योगी हरिरस, त्रिजटा अघोरी, विशुद्धानंद, परमहंस निखिलेश्वरानंद, सुन्दर नाथ, गोला लामा , मुनि उज्जवल हंस, जैसे चुनिन्दा लोग ही परात्पर शिव कि साधना में परांगत हो सके थे, लेकिन इनमें से भी कोई अपर मंडल देवियों तक नहीं पहुँच पाया,लेकिन कौलान्तक नाथ को ये गौरव मिला है वो भी कठोर तप के बाद,कौलान्तक नाथ को आप महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज के नाम से जानते हैं,जो आम आदमी से भी साधारण लगते हैं, कौलान्तक नाथ बर्तमान भारत में साधना जगत के सर्वोत्तम रत्न हैं,लेकिन साधना काल में उनकी हठ धर्मिता ने जहाँ उनको साधना शिखर तक पहुंचा दिया वहीँ कुछ हानिया भी कौलान्तक नाथ की झोली में पड़ी, सबको सहते हुए योगी आज समाज में एक नये रूप में जीने का प्रयास कर रहे हैं,

लेकिन मुझे ये बताना अच्छा लगेगा कि महायोगी अनूठे व्यक्तित्व हैं,सबसे ऐसे मिलते हैं कि मानो उनका अपना ही हो,लेकिन बदले में समाज का रुख? हालांकि महायोगी पर गुरुओं ने ज्यादा लोगों से मिलने जुलने पर पावंदी लगाई हुई है,पर महायोगी ने इसका भी हल आखिर निकाल ही लिया जब पिछले दिनों कई सालों के बाद में कौलान्तक नाथ से मिला तो देखा कि अब तो वो टीवी पर आने लग गए हैं,लोग उनको खूब मानते भी हैं गृहस्थ भक्तों की भी कमी नहीं है ।

मुझ जैसे साधक को बस इतनी चिंता है की बस हमारे कौलान्तक नाथ को कोई दुःख न पहुंचे वो दुष्टों से बचे रहें, मैंने इनसे शक्तिपात लिया था और कई साधनाएँ सीखी हैं अब ब्रम्ह पात पाने की इच्छा है,न जाने कब इतनी कृपा होगी कि कौलान्तक नाथ मुझे इसके काविल समझें,पर ये जरूर है कि ऐसा महापुरुष कुछ सोच विचार कर ही संसार में विचरण करता है अन्यथा इनको हिमालय से उतरने कि जरूरत ही नहीं होती,काश मैं भी इनके साथ रह सकता,कितनी बार इनसे प्रार्थना कि पर मानते ही नहीं,और मुझे इनका साथ मिल ही नहीं पाटा,मिलता है तो इतना कम कि लगता है कि कुछ मिला ही नहीं,न जाने कितनी विद्याएँ इनके पास हैं,आप लोग किस्मत वाले हैं और महायोगी के लिए तो यही कहूँगा कि वो अनूठे व्यक्ति हैं और हिमालय की  शान हैं,हम सबके प्यारे हैं,
-तुमड़ी बाबा

शुक्रवार, 22 जून 2018

इस मंत्र से जग जाएगी आपकी कुण्डलिनी शक्ति
कुण्डलिनी शक्ति मनुष्य की सबसे रहस्यमयी और बेहद शक्तिशाली उर्जा है.जिसके जाग जाने से व्यक्ति पुरुष से परम पुरुष हो जाता है.
कुण्डलिनी शक्ति को जगाना कोई आसन काम नहीं. बड़े-बड़े योगियों की भी उम्र बीत जाती है. तब जा कर कहीं कुण्डलिनी को जगा पाते हैं. किन्तु आप के लिए एक सरल उपाय भी है. जो इसको जगा कर आपको महापुरुष बना सकती है. अपने गुरु से शक्तिपात ले कर या आशीर्वाद ले कर मंत्र सहित कुण्डलिनी ध्यान करना शुरू करें. कुछ दिनों के प्रयास से ही कुण्डलिनी उर्जा अनुभव होने लगेगी. किन्तु इसका एक नियम भी है वो ये है की आपको नशों से दूर रहना होगा. मांस मदिरा या किसी तरह का नशा गुटका, खैनी, पान, तम्बाकू, सिगरेट-बीडी, मदिरा सेवन से बचते हुए ही ये प्रयोग करें, तो सफलता जरूर मिलेगी. इस प्रयोग को सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है. ढीले वस्त्र पहन कर गले में कोई भी माला धारण कर लें और हाथों में मौली बाँध लें जो आपको मनो उर्जा देगी. फिर सुखासन में बैठ जाएँ, पर जमीन पर एक आसन जरूर बिछा लें. यदि संभव हो तो आसन जमीन से ऊंचा रखें. अब आँखें बंद कर तिलत लगाने वाले स्थान पर यानि दोनों भौवों के बीच ध्यान लगाते हुए मंत्र गुनगुनाये.

मंत्र-हुं यं रं लं वं सः हं क्षं ॐ

इस मंत्र में प्रणव यानि की ॐ का उच्चारण मंत्र के अंत में होता है जबकि आमतौर पर ये सबसे पहले लगाया जाने वाला प्रमुख बीज है. अब लगातार लम्बी और गहरी सांसे लेते हुए मंत्र का उच्चारण करते रहें तो आप देखेंगे की तरह-तरह के अनुभव आपको इस कुण्डलिनी मंत्र से होने लगेंगे. धीरे-धीरे स्पन्दन बढ़ने लगेगा. इस अवस्था में फिर गुरु का मार्गदर्शन मिल जाए तो ये उर्जा किसी भी कार्य में लगायी जा सकती है. भौतिक जगत में लगा कर आप अनेक प्रकार के भोग-भोग सकते हैं या चाहें तो योगिओं की भांति अनन्त का ज्ञान प्राप्त कर दुखों से मुक्त हो परम आनदमय मृत्यु रहित जीवन जी सकते है. कुण्डलिनी उर्जा का प्रयोग सदा अच्छे कार्यों में ही करना चाहिए अन्यथा उद्दंडता करने पर ये प्रकृति आपका विनाश भी कर सकती है.

-कौलान्तक पीठाधीश्वर
महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज