बुधवार, 26 जून 2024

तारा महाविद्या-बौद्धाचार-कौलाचार-चीनाचार-गोम्पा
''तारा महाविद्या-नील सरस्वती साधना'' एक अत्यंत जटिल और उच्च कोटि की साधना मानी गयी है। लेकिन इस ''दिव्य महाविद्या'' को समझ पाना सरल नहीं है। ''महर्षि विश्वामित्र और वशिष्ठ'' जैसे सर्वोच्च ऋषियों नें भी ''तारा महाविद्या'' को जानना चाहा। लेकिन उनका साहस भी आखिर टूट गया। तब महाचीन जा कर उनहोंने एक ''बुद्ध से चीनाचार'' द्वार तारा को सिद्ध किया। आज चीनाचार बदल गया है। आज काल और काल की गति बदल गयी है। तंत्र का दक्षिण मारग और वाम मारग मानों आखिरी साँसे गिन रहा हो। साहित्यकार और शोधार्थी तो ये तक नहीं ढूंढ पा रहे की भारत का तंत्र प्राचीन है या चीन का? बौद्ध धर्म के बज्रयान नें तारा को प्रमुख आराध्या माना और आज तक वो अपने 'गोम्पा में तारा को स्थान दिए हैं। ''कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज'' नें बाल्यावस्था में हिमाचल प्रदेश के ''लौहुल-स्पीती'' क्षेत्रों में भोटी भाषा और बौद्ध धर्म के तन्त्रयान को लामाओं से निकटता से समझा है। लगभग पांच वर्ष का अभ्यास और कौलमत नें ''कौलान्तक नाथ'' को बहुत कुछ प्रदान किया है। आज भी ''कौलान्तक नाथ'' का ''बौद्ध धर्म'' के प्रति 'मैत्री पूर्ण' प्रेम कम नहीं हुआ है।
जैसे ही गुजरात के अहमदाबाद में 19-20 जनबरी 2013 को ''तारा महाविद्या-नील सरस्वती साधना शिविर'' की घोषणा हुयी। ''कौलान्तक नाथ'' हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के निकट स्थित बोद्ध गोम्पा गए। वहां उनहोंने ''चीनाचार और बोद्धाचार'' को याद किया। माँ तारा से पूर्णता व ''हिन्दू और बोद्धों'' के मध्य मैत्री, प्रेम व शांति बनाये रखने की प्रार्थना की। आपकी सेवा में प्रस्तुत है। बोद्ध गोम्पा में ''कौलान्तक नाथ'' की एक छोटी सी दुर्लभ विडिओ-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय

सोमवार, 4 मार्च 2019

महा शिवरात्रि साधना
कौलान्तक पीठ हिमालय शुभकामनाएं देना चाहता है, और सभी भैरवों और भैरवियों के लिए आपकी सलामती, शांति और खुशी के लिए प्रार्थना करता है जो सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं। जो लोग शिवरात्रि पर विशेष साधना करना चाहते हैं, वे रात में शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं और रुद्राक्ष माला के साथ या इसके बिना इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
मंत्र: || ॐ आं ह्रीं क्रौं सः त्रिलोकेश्वराय श्री त्र्यम्बकाय नमः ||
यह मंत्र विशेष रूप से आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति के लिए है और यह बीमारियों, आर्थिक समस्याओं, प्रेम के मुद्दों और बुरी ऊर्जाओं को दूर करने के लिए प्रभावी है।

शिव पूजा के लिए किसी को विस्तृत अनुष्ठानों की आवश्यकता नहीं होती है। शिव पूजा करने के लिए साधारण रूप से फूल, साधारण जल का उपयोग किया जा सकता है। चूंकि यह रात का त्योहार है, इसलिए आप चाहे तो पूरी रात भी साधना कर सकते है।

|| ॐ सं सिद्धाय नमः ||
|| ॐ श्री गुरु मंडलाय नमः ||
|| ॐ महा हिमालयाय नमः ||
|| ॐ प्रिया ईशपुत्राय नमः ||

ॐ नमो आदेश!

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कौलान्तक पीठ टीम, हिमालय

शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

प्रेम प्राप्ति हेतु लघु उपाय एवं साधना
क्या आपका मन किसी को पाने के लिए या जीवन साथी बनाने के लिए मचल रहा है? क्या आपके पास सबकुछ होते हुये भी प्यार नहीं है? क्या आपकी शादी नहीं नहीं हो पा रही? तो ये परेशान मत होइए आज हम आपके लिए लाये हैं वो सभी उपाय जिनको करने के बाद आपकी प्रेमिका कहेगी कि मैं जोगन तेरे प्रेम की.........
 जब भी किसी को प्रेम करें तो याद रखें कि संयम और प्रतीक्षा सबसे उत्तम उपाय है
ईश्वर से प्रेम के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, क्योंकि दुआओं में असर होता है
प्रेम प्राप्ति के लिए आप भगवान् कामदेव और देवी रति के साथ साथ शिव-शक्ति,गणपति,और भगवान विष्णु जी की पूजा कर सकते हैं
इन्द्र देवता,अग्नि देवता,चन्द्रमा देवता,अप्सराओं व यक्षिणी देवियों की उपासना भी प्रेम प्रदान करती हैं
देवी दुर्गा जी से मांगी गयी प्रेम व सुख शान्ति सौभाग्य की तत्काल पूर्ती होती है
यदि प्रेम विवाह करना चाहते हैं तो ब्रत एवं दान बहुत सहायक होते हैं
प्रेम प्राप्ति के कुछ अति सरल दिव्य मंत्र
कृष्ण जी का मंत्र -ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजन बल्लभाय स्वाहा ॥
कृष्ण मंदिर में मुरली बांसुरी ले जा कर अर्पित करें
पान अर्पण से प्रेम प्राप्ति होती है
यदि प्रेम में फूट पड़ गयी हो तो उसे पुनह पाने के लिए भैरव जी की पूजा अचूक उपाय है
भैरव देवता को मीठी रोटी का प्रसाद बना कर अर्पित करें
मानसिक तौर से उत्तरनाथ भैरव का मंत्र जपें
भैरव जी का मंत्र-ॐ ज्लौं र्हौं क्रौं उत्तरनाथ भैरवाय स्वाहा ॥
यदि आप किसी को अपना बनाना चाहते हैं तो माँ शक्ति की पूजा करे
माता को लाल रंग का झंडा अर्थात ध्वजा चढ़ाएं व मनोकामना मांगें
माँ शक्ति का मंत्र-ॐ नमो मोहिनी महामोहिनी अमृत वासिनी स्वाहा:
देवराज इन्द्र की पत्नी इंद्रायणी की स्तुति को अमोघ माना जाता हैं कई ऋषि पुत्रियों ने उनकी स्तुति कर वर पाया है
इंद्रायणी देवी की पूजा उन्हें करनी चाहिए जो नहीं जानते की उनके जीवन में कौन आने वाला है
तब देवी प्रसन्न हो कर अत्यंत स्रेष्ठ प्रेमिका व पति या पत्नी प्रदान करती है
इंद्रायणी देवी का मंत्र-ॐ देवेंद्राणी विवाहं भाग्यमारोग्यम देहि मे
बीस के अंक को विवाह का अंक माना जाता है विवाह में समस्या पर चार खाने बना कर केवल बीस बीस लिखना चाहिय
बीस के इस यन्त्र को धारण करने से या पास रखने से विवाह हो जाता है


यन्त्र- 20 20 20 20
          20 20 20 20
          20 20 20 20
          20 20 20 20


गोमेद नामक रत्न को गलें में पहनने से विवाह लाभ होगा
चांदी में मोती की अंगूठी पहनने से प्रेम बढेगा
हीरे अथवा जरकन के आभूषण प्रेम में बृद्धि करेंगे
नीलम की अंगूठी प्रतिष्ठित कर पहनने से और संकल्पित करने से प्रेम में सफलता मिलती है
शहद के रुद्राभिषेक से मनचाहा प्रेम मिलेगा
सोलह सोमवार के ब्रत से योग्य सुन्दर सुशील पति मिलेगा
अन्न दान करने से प्रेम विवाह संपन्न होता है
गौरी देवी को चुनरी श्रृंगार चढाने व मौली बांधने से मनमीत मिलता है
मधुर व्यबहार मीठी बाणी जीवन में स्थाई प्रेम प्रदान करने में समर्थ हैं
धीरज और संतोष के साथ साथ सकारात्मक आत्मविश्वास भी होना चाहिए
योग मेडिटेशन और संगीत सहित शाकाहार को अपनाएँ
नशों से दूर रहना चाहिए

कौलान्तक पीठाधीश्वर
महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

प्रेम में सफलता वो भी बिना मंत्र!
प्रेम अनाहत चक्र से उत्पन्न होता है. ह्रदय अनाहत चक्र ही है. योग में एक ऐसा गोपनीय चमत्कार छिपा है जिसे जान कर आप हैरान हो जायेंगे. कोई दूसरा व्यक्ति हमसे इसलिए नफरत करता है क्योंकि आपका अनाहत चक्र उसे प्रेम की तरंगे नहीं भेजता या वो आपकी तरंगों को ग्रहण नहीं कर पाता. यदि आप कसी को अपना बनाना चाहते हैं या चाहते हैं की सभी आपकी ओर प्यार भरी निगाह से देखें, तो एक आसन सा उपाय है अनाहत चक्र पर ध्यान करना. जी हाँ ध्यान करना! सुबह के समय कुछ देर आराम से आलथी पालथी मार कर जमीन पर बैठ जाएँ. इस अवस्था को सुखासन कहा जाता है. और जहाँ दोनों फेफड़े जुड़ते है यानि छाती का मध्य भाग, आँख बंद कर उस स्थान पर ध्यान लगायें. अब लम्बा और गहरा श्वास भीतर भरते जाएँ और सोचें की आपकी नासिका से बादल भीतर जा रहे हैं और बारिश कर रहे हैं. जिससे एक दिव्य कमल का फूल खिल गया है. फूल के खिलते ही अन्दर से एक और फूल निकल रहा है उसके भीतर एक और,उसके भीतर एक और. इस तरह लगातार खिलता ही जा रहा है. चारों और सुगंध फैल गयी हैं. अब जब बहुत आनंद आने लगे तो उस पुष्प पर अपने इष्ट देवता का ध्यान करें.

फिर गुरु का

फिर उस व्यक्ति विशेष का जिसे आप प्रेम करते हैं. कुछ दिन इस क्रिया को दौहराइये और फिर देखिये चमत्कार. किसी मंत्र की भी जरूरत नहीं ये ध्यान का एक छोटा सा भाग है. लेकिन यदि आप लम्बे समय तक इसे करते हैं और किसी व्यक्ति विशेष की जगह गुरु और इष्ट का ध्यान करते हैं तो महाचमत्कार होगा. आप बहुत से लोगो के चहेते बनने लग जायेंगे. आपके शत्रु भी आपसे मित्र जैसा व्यहार करने लग जायेंगे.


-कौलान्तक पीठाधीश्वर
महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज