शनिवार, 31 अगस्त 2019

ईशपुत्र की विशेषता
"ईशपुत्र" की ये विशेषता है की वो कहीं भी कभी भी साधना और ध्यान की गहराइयों में उतर सकते हैं। उनके लिए स्थान और कोलाहल भी मायने नहीं रखता। जीवन की सत्य धारा के परम पथिक "कौलान्तक नाथ" साधकों के मन में इष्ट की भांति बसते हैं। लेकिन ये सब अकारण नहीं होता। इस आकर्षण का रहस्य महाप्रतिभाशाली साधक स्वयं जानते हैं। पीठ केवल अपने सम्प्रदायानुगत साधकों के निमित्त "कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज" के कुछ और चित्र प्रस्तुत करती है। आशा है साधक वृन्द के हृदय कमलों का इन चित्रों से विकास होगा और भक्ति साधना का आनंद होगा-कौलान्तक पीठ टीम-हिमालय।

गुरुवार, 2 मई 2019

पूजा सामग्री का महत्त्व
मौली "शक्ति तत्त्व" का प्रतीक है और ये सुरक्षा का भी प्रतीक है । मौली शक्ति का "महाकवच" माना जाता है इसलिए निरंतर और नित्य आपको हाथ मेँ मौली धारण करने को कहा जाता है । हर गृहस्थ को ये करना चाहिए और समस्त देवताओँ और देवियोँ की पूजा मेँ मौली का विशेष स्थान है । मौली धारण करने से कृत्याप्रयोग, अकाल मृत्यु और समस्त प्रकार की दुर्धटनाओँ और विघ्न-बाधाओँ से सुरक्षा मिलती है इसलिए भी इष्ट के नाम से मौली धारण की जाती है और मौली "सुरक्षा कवच" है । तो संपूर्ण परिवार की सुरक्षा भी मौली से होती है इसलिए मौली मेँ तीन बार उसको लपेटकर गाँठ उसमेँ डाली जाती है । मौली धारण करने का मन्त्र है और इष्ट को देने का मन्त्र है : ॐ भ्रौं श्री इष्ट देवताय नमः रक्षा बन्धनं समर्पयामि ॥ (जब आप इष्ट को देँ) और जब आप स्वयं पहने तो : ॐ भ्रौं श्री इष्ट देवताय नमः रक्षा बन्धनं कुरु ॥ इस प्रकार से आपको मन्त्र कहना चाहिए और मौलीसूत्र को इष्ट के विग्रह के हाथोँ मेँ बान्धना चाहिए और स्वयं भी । मौली इष्ट को अर्पित करने से देवता नियमित रुप से भक्त के घर मेँ ही निवास करने लगते है और इष्ट को चढाई गई मौली का एक टूकडा अपने हाथ मेँ पहनने से करोडोँ शत्रुओँ के मध्य भी आपकी रक्षा होती है और मौली मन्दिर मेँ यदि आप अर्पित करते है तो समस्त गुप्त मनोकामनाएँ तो पूर्ण होती ही है लेकिन वाक् चातुर्य और बोलने की आपको अद्भुत क्षमता की प्राप्ति होती है ये एक सिद्ध प्रयोग है । - महासिद्ध ईशपुत्र

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

प्रेम में सफलता वो भी बिना मंत्र!
प्रेम अनाहत चक्र से उत्पन्न होता है. ह्रदय अनाहत चक्र ही है. योग में एक ऐसा गोपनीय चमत्कार छिपा है जिसे जान कर आप हैरान हो जायेंगे. कोई दूसरा व्यक्ति हमसे इसलिए नफरत करता है क्योंकि आपका अनाहत चक्र उसे प्रेम की तरंगे नहीं भेजता या वो आपकी तरंगों को ग्रहण नहीं कर पाता. यदि आप कसी को अपना बनाना चाहते हैं या चाहते हैं की सभी आपकी ओर प्यार भरी निगाह से देखें, तो एक आसन सा उपाय है अनाहत चक्र पर ध्यान करना. जी हाँ ध्यान करना! सुबह के समय कुछ देर आराम से आलथी पालथी मार कर जमीन पर बैठ जाएँ. इस अवस्था को सुखासन कहा जाता है. और जहाँ दोनों फेफड़े जुड़ते है यानि छाती का मध्य भाग, आँख बंद कर उस स्थान पर ध्यान लगायें. अब लम्बा और गहरा श्वास भीतर भरते जाएँ और सोचें की आपकी नासिका से बादल भीतर जा रहे हैं और बारिश कर रहे हैं. जिससे एक दिव्य कमल का फूल खिल गया है. फूल के खिलते ही अन्दर से एक और फूल निकल रहा है उसके भीतर एक और,उसके भीतर एक और. इस तरह लगातार खिलता ही जा रहा है. चारों और सुगंध फैल गयी हैं. अब जब बहुत आनंद आने लगे तो उस पुष्प पर अपने इष्ट देवता का ध्यान करें.

फिर गुरु का

फिर उस व्यक्ति विशेष का जिसे आप प्रेम करते हैं. कुछ दिन इस क्रिया को दौहराइये और फिर देखिये चमत्कार. किसी मंत्र की भी जरूरत नहीं ये ध्यान का एक छोटा सा भाग है. लेकिन यदि आप लम्बे समय तक इसे करते हैं और किसी व्यक्ति विशेष की जगह गुरु और इष्ट का ध्यान करते हैं तो महाचमत्कार होगा. आप बहुत से लोगो के चहेते बनने लग जायेंगे. आपके शत्रु भी आपसे मित्र जैसा व्यहार करने लग जायेंगे.


-कौलान्तक पीठाधीश्वर
महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज