कुलं शक्तिरिति प्रोक्तमकुलं शिव उच्यते ।
कुलाकुलस्य सम्बन्धः कौलमिति विधीयते ॥
शब्दार्थ
कुलम् — शक्ति, प्रकृति, शक्ति-तत्त्व
शक्तिः इति प्रोक्तम् — शक्ति कहा गया है।
अकुलम् — शिव, परम तत्त्व
शिवः उच्यते — शिव कहा जाता है।
कुल-अकुलस्य सम्बन्धः — शक्ति और शिव का सम्बन्ध/ऐक्य
कौलम् इति विधीयते — ‘कौल’ कहलाता है।
भावार्थ
शक्ति को ‘कुल’ और शिव को ‘अकुल’ कहा गया है। शिव और शक्ति के सम्बन्ध अथवा उनके अभिन्न ऐक्य को ‘कौल’ कहा जाता है।
अर्थात् कौल-दर्शन में शिव और शक्ति दो स्वतंत्र अथवा विरोधी तत्त्व नहीं हैं, बल्कि दोनों एक ही परम तत्त्व के दो पक्ष हैं। शिव चेतन तत्त्व हैं और शक्ति उसी चेतना की क्रियाशील अभिव्यक्ति। इन दोनों के सामरस्य को ही कौल कहा जाता है।
यहाँ ‘कुल’ का अर्थ केवल परिवार या वंश नहीं, बल्कि शक्ति-तत्त्व और उससे सम्बद्ध समस्त तत्त्व-समूह के अर्थ में लिया जाता है; वहीं ‘अकुल’ शिव हैं, जो कुल से परे परम तत्त्व मा
ने जाते हैं।
