गुरुवार, 10 जुलाई 2025

गुरु पूर्णिमा सन्देश

 हिमालय सिद्ध साधकों से विहीन न हो जाए। ये धरा दया, धर्म और प्रेम विहीन न हो जाए। इसलिए गुरु प्रदत्त मार्ग पर बढ़ते जाना। उनके शब्दों को साकार करते जाना।



शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

धर्ममय भारत

हमारे राष्ट्र की जो सबसे बड़ी पूंजी है वह न तो हीरे है ना तो मोती है, न ही अस्त्र-शस्त्र है और ना ही कोई युद्ध विद्या या कौशल है। हमारे राष्ट्र की जो सबसे बड़ी पूंजी है वो धर्म है! हमने धर्म से ऊपर कभी किसी चीज को रखा नहीं, हमारे लिए धर्म के अतिरिक्त कोई सत्ता है ही नहीं और धर्म ही है जो धारण करने योग्य हैं।
- ईशपुत्र